Translations:Saint Germain/96/hi
प्रोक्लस (Proclus) ने यह स्वीकार किया था कि उन्हें जागरूकता और दर्शनज्ञान ईश्वर से मिला था। वे स्वयं को 'दिव्य रहस्योद्घाटन' का एक माध्यम मानते थे। उनके शिष्य मारिनस (Marinus) के शब्दों में "वे वाकई दिव्य प्रेरणा से प्रतीत होते थे क्योंकि जब उनके मुख से ज्ञानपूर्ण शब्द निकलते थे उनकी आँखों से एक तेज़ आभा निकलती थी, और उनका पूरा शरीर दिव्य प्रकाश से जगमगाता था।"[1]
- ↑ विक्टर कज़िन एंड थॉमस टेलर, अनुवादक, ट्रीयटाईसीस ऑफ प्रोक्लस, द प्लेटोनिक सक्सेसर (लंदन: ऍन.पी., 1833), पी.वी. [Victor Cousin and Thomas Taylor, trans., Two Treatises of Proclus, The Platonic Successor "प्लेटो की परंपरा के उत्तराधिकारी प्रोक्लस के दो ग्रंथ" (London: n.p., 1833), p. vi.]