Translations:Original sin/42/hi

From TSL Encyclopedia

जब सात चक्रों (seven chakras) की सात दीक्षाएँ (initiations) पार कर ली जाती हैं और तैंतीस चरण (thirty-three steps) पूरे कर लिए जाते हैं, तब पुरुष और स्त्री भीतर स्थित “एक” की पूर्णता (wholeness of the One) में लौट आते हैं।

जब दोनों इस “अलगाव” (separation) से मुक्त होकर पूर्णता की अवस्था में प्रवेश कर लेते हैं, तब उनकी इच्छा (desire) अब अधूरापन (incompleteness) पर आधारित नहीं रहती, बल्कि केवल वही पवित्र इच्छा (holy desire) रह जाती है जो पिता-माता परमेश्वर (Father-Mother God) की एकता से उत्पन्न होती है।