Translations:Lord Maitreya/11/hi
जूट का थैला जो वे हमेशा अपने साथ रखते थे, उन्हें एक अलग पहचान देता था। जो कुछ भी उन्हें मिलता था, उसे वे इस थैले में डाल देते, और इसी कारणवश ये थैला सबके लिए कौतुहल (curiosity), का विषय बन गया था, विशेषकर बच्चों में इसके प्रति काफी उत्सुकता थी। बच्चे मैत्रेय का पीछा करते, उनके ऊपर चढ़ जाते, और उन्हें अपना थैला खोलने के लिए मजबूर करते। ऐसे में मैत्रेय उस थैले को जमीन पर रख, एक-एक करके सारा सामान निकालकर बाहर रख देते, और फिर विधिपूर्वक सब वापस थैले में डाल देते। मैत्रेय के चेहरे के हाव-भाव काफी रहस्यमय थे और ये भाव उनकी [ज़ेन] (धीरता) को प्रदर्शित करते थे... एक बार एक भिक्षु ने उनसे थैले के बारे में पूछ लिया। उत्तर में मैत्रेय ने थैले को जमीन पर रख दिया। जब भिक्षु ने उनसे पूछा कि इसका क्या मतलब है, तो उन्होंने थैला उठाया, कंधे पर रखा और चल दिए। एक बार किसी ने उनसे पूछा कि थैला कितना पुराना है, तो उन्होंने जवाब दिया कि थैला अंतरिक्ष जितना पुराना है।[1]
- ↑ केनेथ के.एस. चेन, बुद्धिज़्म इन चाइना: ऐ हिस्टोरिकल सर्वे (प्रिंसटन, एन.जे.: प्रिंसटन यूनिवर्सिटी प्रेस, १९६४ ), पृष्ठ ४०५-६ (Kenneth K. S. Ch’en, Buddhism in China: A Historical Survey [Princeton, N.J.: Princeton University Press, 1964], pp. 405–6.)