आकाशीय आश्रय स्थल

From TSL Encyclopedia
This page is a translated version of the page Etheric retreat and the translation is 100% complete.
Other languages:

श्वेत महासंघ (Great White Brotherhood) के केंद्र या आध्यात्मिक आश्रम, जो आकाशीय स्तर पर स्थित हैं, वहां दिव्य गुरु (ascended masters) रहते हैं। प्रत्येक आकाशीय आश्रय स्थल में ईश्वरत्व की एक या एक से अधिक लौ (flames of the God head) संग्रहीत होती है। गुरुओं की सेवा और आध्यात्मिक उपलब्धियों की शक्ति को धारण करते हुए, वे किसी भी ग्रह और उस पर विकसित होने वाले समस्त जीवन के चार निम्न शरीरों (four lower bodies) (भौतिक, भावनात्मक, मानसिक और सूक्ष्म) में प्रकाश का संतुलन बनाये रखते हैं।

आकाशीय आश्रय स्थल वह स्थान है जहाँ दिव्य गुरु रहते हैं। इस स्थान पर वे अपने चेलों का स्वागत करते हैं। इसे एक मंडल या एक आध्यात्मिक ऊर्जा-क्षेत्र (forcefield) भी कह सकते है जिसका उपयोग सौर पदक्रम (solar hierarchies) पृथ्वी गृह और वहां रहने वाले लोगों को ऊर्जा प्रदान करने के लिए करते हैं। यहाँ से दिव्य गुरु और उनके शिष्य उस ऊर्जा को “कम” या संतुलित करके मानवता में वितरित करते हैं। श्वेत महासंघ के आकाशीय आश्रय स्थल तब से हैं जब से पृथ्वी का निर्माण हुआ है।

आश्रय स्थलों के कार्य

पृथ्वी पर जीवन तरंगों (lifewaves) की सेवा करने वाले पदक्रम की परिषदों (councils of the hierarchy) के लिए आश्रय स्थल कई प्रकार से कार्य करते हैं। कुछ आश्रय स्थल उन मानवों के लिए हैं जिनका आध्यात्मिक उत्थान नहीं हुआ है - इनकी जीवात्माएं पृथ्वी पर अपने विभिन्न जन्मों के बीच के समय में अपने आकाशीय शरीर (etheric body) में इन आश्रय स्थलों पर रहती हैं, वे नींद के समय या समाधि (गहन ध्यान एवं आध्यात्मिक समाधि) की अवस्था में अपने सूक्ष्म शरीरों में इन आध्यात्मिक केंद्रों तक पहुँच सकती हैं।

पृथ्वी के प्रारंभिक स्वर्ण युगों के समय दिव्य गुरुओं के ये आश्रय स्थल और उनके गुप्त विद्यालय (mystery school) पृथ्वी पर ही स्थित थे। पतित देवदूतों (fallen angels) द्वारा महा विद्रोह (Great Rebellion) और उनके पतन (the Fall) के बाद भी ये आश्रय स्थल पृथ्वी पर ही रहे। लेकिन मानव द्वारा उनके अपमान और विनाश के कारण गुरुजन उन्हें सूक्ष्म आध्यात्मिक लोक (etheric plane) में ले गए, जहाँ वे अब अदृश्य रूप में माने जाते हैं।

एलोहीम (Elohim) के आश्रय स्थल

एलोहिम (Elohim) के आश्रय स्थल (retreats) पृथ्वी ग्रह पर सबसे शक्तिशाली माने जाते हैं क्योंकि एलोहिम की चेतना में ईश्वर की विशाल ब्रह्मांडीय जागरूकता निहित है। पृथ्वी पर एलोहिम के आश्रय स्थल और उनकी दिव्य अग्नि (flame) के केंद्र, मानव शरीर के सात प्रमुख चक्रों (chakras) के समान हैं। ये पृथ्वी के शरीर पर स्थित सात किरणों के प्रमुख केंद्र हैं। जिन जीवों का आध्यात्मिक उत्थान नहीं हुआ होता उन्हें एलोहिम के आश्रय स्थलों में नहीं ले जाया जाता क्योंकि एलोहीम के आश्रय स्थलों को पूर्णतया शुद्ध रखा जाता है ताकि इनकी तरंगों से वरगो और पेलूर (Virgo and Pelleur) के शरीर में जीवन संचालन किया जा सके तथा ब्रह्माण्ड के साथ एकरूप किया जा सके।

चूँकि Elohim की चेतना ब्रह्मांडीय (cosmic) है और उनका कार्य आकाशगंगाओं (galaxies) तथा महान केन्द्रीय सूर्य (Great Central Sun) से भी आगे तक फैला हुआ है, इसलिए वे अपने आश्रमों (retreats) के संचालन और देखरेख के लिए प्रतिनिधियों को नियुक्त करते हैं, जो उन आश्रमों के आध्यात्मिक प्रमुख (hierarchs) और प्रशासक होते हैं।

उनके आश्रम ऐसे पवित्र केंद्रों की तरह हैं, जहाँ वे समय-समय पर अपनी चेतना को स्थापित (anchor) करते हैं, जबकि वे ब्रह्मांडीय सेवा में निरंतर सक्रिय रहते हैं।

निस्संदेह, Elohim, जो स्वयं ईश्वर के स्वरूप माने जाते हैं, अपने अस्तित्व की एक इलेक्ट्रॉनिक उपस्थिति (Electronic Presence) — अर्थात अपनी दिव्य चेतना और पूर्ण ईश्वरीय शक्ति की प्रतिकृति — अपने आश्रमों में स्थापित कर सकते हैं। वहाँ उनकी ईश्वर-चेतना की पूर्ण प्रज्वलित वास्तविकता केंद्रित रहती है।

आध्यात्मिक ज्ञान के गुप्त विधालय भौतिक दुनिया से हटाकर आश्रय स्थलों में स्थापन ।

मनुष्य के पतन (the Fall of man) के बाद श्वेत महासंघ (Great White Brotherhood) ने लेमुरिया (Lemuria)और अटलांटिस (Atlantis) में गुप्त विद्यालयों को स्थापित किया। यहाँ उन लोगों को आध्यात्मिक ज्ञान दिया जाता था जो सिद्ध पुरुषों (adept) के अनुशासन को बनाए रखना जानते थे। आधुनिक समय की बात करें तो गौतम बुद्ध का संघ (Sangha), कुमरान (Qumran) में स्थित एस्सेन समुदाय (Essene community) और पाइथागोरस (Pythagoras) का विद्यालय क्रोटोना (Crotona) कुछ ऐसे कुछ विद्यालय हैं जो अन्य गुप्त विधालय हिमालय पर्वत पर स्थित, सुदूर पूर्व (Far east), मिस्र, युरोप तथा दक्षिणी अमरीका में थे। परन्तु समय के साथ, ये सभी विद्यालय या तो नष्ट कर दिए गए या फिर ये विघटित (disbanded) कर दिए गए।

भूतल पर जहाँ जहाँ ये विद्यालय नष्ट हुए, इन्हें स्थापित करने वाले दिव्य गुरुओं ने वहां से इन विद्यालयों को अपनी लौ समेत आकाशीय तल खींच लिया। अब इन आकाशीय आश्रय स्थलों में दिव्यगुरूओं के शिष्य पृथ्वी पर अपने विभिन्न जन्मों के अंतराल या फिर निद्रा या समाधि के दौरान अपने सूक्ष्म शरीरों में प्रशिक्षण लेते हैं ताकि वे उस दिव्य आत्म-ज्ञान को प्राप्त कर सकें, जिसे सेंट जर्मेन ने इस शताब्दी में पुनः विकसित किया था - इससे पहले यह ज्ञान सदियों तक भौतिक तल पर मानवजाति को उपलब्ध नहीं था।

आश्रय स्थलों के स्थान

पृथ्वी पर दिव्य गुरूओं के आश्रय स्थलों, मंदिरों और केंद्रों की स्थापना अत्यंत वैज्ञानिक रूप से की गयी है। ये पृथ्वी मंडल के कुछ विशेष बिंदुओं पर स्थित हैं, उन बिंदुओं पर जहाँ से पृथ्वी-वासियों को सर्वाधिक ऊर्जा भेजी जा सके। पृथ्वी के ग्रेट हब (Great Hub) (जिसे महान केंद्रीय सूर्य भो कहते हैं) पर सभी आश्रय स्थल ऊर्जा को अन्य ग्रहों, और फ्लेमिंग योड (flaming Yod) से ग्रहण करने तथा फिर उस ऊर्जा को (पृथ्वी को) भेजने के स्थान हैं।

इन आश्रय स्थलों से निकलने वाला प्रकाश चुंबकीय तरंगों की तरह पृथ्वी और आश्रय स्थलों के बीच बहता है। प्रकाश की इन तरंगों के परस्पर संपर्क से एक ब्रह्मांडीय स्वर की उत्त्पत्ति होती है जो कि महा आमीन, ओम्, या ॐ की ध्वनि की प्रतिध्वनि है, जिसे सिर्फ अपने आंतरिक कान से ही सुना जा सकता है। यह ब्रह्मांडीय मूल राग पृथ्वी, प्रकृति जगत और मानवजाति को सृष्टि के सबसे पवित्र शब्द, जिसका शाब्दिक अर्थ है "अहम्" (I AM) या "ईश्वर महा आमीन है" (God is the great Amen.) की ध्वनि में नहला देता है। इससे हमें यह ज्ञात होता है कि प्रत्येक व्यक्ति इस शब्द की ध्वनि के साथ एकमय हो सकता है।

आश्रय स्थलों का खुलना

26 फ़रवरी 1973 को संदेशवाहक मार्क एल. प्रोफेट (Mark L. Prophet) के ascension (आध्यात्मिक उत्थान ) के बाद, ईश्वर के बच्चों को कर्मों के स्वामी (Lords of Karma) की ओर से अपने कर्मों का संतुलन (balance) करने का एक नया अवसर दिया गया। यह अवसर उन्हें सात चौहानों (chohan), महा चौहान (Maha Chohan) और विश्व शिक्षक (World Teacher) के आध्यात्मिक आश्रमों (retreats) में जाकर शिक्षा प्राप्त करने के माध्यम से प्राप्त होगा।

1 जनवरी 1986 को गौतम बुद्ध और कर्मों के स्वामियों (Lords of Karma) ने सात किरणों (lords of the seven rays) के स्वामियों की एक प्रार्थना (petition) को स्वीकार किया। जिसमें उन्होंने अपने आकाशीय आश्रय स्थलों (etheric retreats) में आध्यात्मिक विश्वविद्यालय (universities of the Spirit) खोली गईं, ताकि विद्यार्थी सात किरणों के मार्ग पर आत्म-नियंत्रण और आत्म-सिद्धि (self-mastery) का व्यवस्थित रूप से अभ्यास कर सकें। विद्यार्थी नींद के दौरान अपने सूक्ष्म शरीरों (finer bodies) में यात्रा करते हुए, प्रत्येक chohan और Maha Chohan के आश्रम में चौदह दिन बिताते हैं।

इसे भी देखिये

Category:Etheric retreats/hi

अधिक जानकारी के लिए

Elizabeth Clare Prophet, The Opening of the Temple Doors

El Morya, The Chela and the Path: Keys to Soul Mastery in the Aquarian Age, पांचवा अध्याय.

स्रोत

एलिजाबेथ क्लेयर प्रोफेट, २२ फरवरी १९७५

Mark L. Prophet and Elizabeth Clare Prophet, Saint Germain On Alchemy: Formulas for Self-Transformation.

Mark L. Prophet and Elizabeth Clare Prophet, The Path to Immortality.