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अगर सृष्टि देव प्रदूषण और मानव जाति के कर्मों के भार तले न दबे होते तो पृथ्वी कैसी होती? ऐसे समय का चित्रण मार्क प्रोफेट ने हमारे सामने एक बार प्रस्तुत किया था: